गीत “ लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में” 1966 की फ़िल्म कन्यादान का मशहूर गाना है, जिसे मोहम्मद रफ़ी ने गाया था। 🎵
इसका मूल भाषा हिंदी-उर्दू (फ़िल्मी हिंदी में उर्दू के रंग के साथ) है।
गाना: लिखे जो ख़त तुझे
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फ़िल्म: कन्यादान (1966)
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गायक: मोहम्मद रफ़ी
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संगीतकार: शंकर–जयकिशन
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गीतकार: नीरज
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अभिनेता/परदे पर: शशि कपूर, आशा पारेख
मूल भाषा
यह गाना हिंदी-उर्दू मिश्रित में लिखा गया है। उस दौर के फ़िल्मी गीतों में हिंदी व्याकरण + उर्दू अल्फ़ाज़ (जैसे ख़त, निगाहें, फ़िज़ा, मंज़िल, वफ़ा) का इस्तेमाल आम था। इसलिए इसे “हिंदी-उर्दू” या “हिंदुस्तानी” कहा जा सकता है।
लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में (Original Lyrics)
(जैसा फ़िल्म में मोहम्मद रफ़ी ने गाया है)
मतलब (सरल व्याख्या)
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नायक कहता है कि उसने जो ख़त (चिट्ठियाँ) प्रेमिका को लिखे, वे सिर्फ़ काग़ज़ नहीं रहे, बल्कि फूलों और सितारों जैसे हसीन नज़ारे बन गए।
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प्रिय की मौजूदगी उसकी ज़िंदगी को बहारों से भर देती है।
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उसके बिना कोई मंज़िल, कोई राह मायने नहीं रखती।
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प्रेम की गहराई और समर्पण को बहुत शायराना अंदाज़ में व्यक्त किया गया है।
👉 यह गाना आज भी क्लासिक रोमांटिक गीतों में गिना जाता है और मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ ने इसे अमर बना दिया।
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लिखे जो ख़त तुझे – (कन्यादान, 1968)
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एहसान तेरा होगा मुझ पर – (जंगली, 1961)
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तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है – (चिराग, 1969)
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पुकारता चला हूँ मैं – (मेरे सनम, 1965)
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ख़ुड़ा भी आसमाँ से – (धूल का फूल, 1959)
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बहारों फूल बरसाओ – (सूरज, 1966)